मॉस्कोः ईरान पर हमले के लिए अमेरिका पूरी तरह से तैयार है। रशिया टु़डे ने अमेरिका के वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के हवाले बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर विस्तृत ब्रिफिंग दी गई है। यह ब्रिफिंग व्हाइट हाउस और पेंटागन द्वारा तैयार की गई है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाओं पर हमले समेत शासन पर दबाव बढ़ाने के कई विकल्प शामिल हैं।
रिपोर्ट में खास तौर पर एक बड़े पैमाने का प्लान बताया गया है, जिसमें ईरान के दर्जनों राजनीतिक और सैन्य नेताओं को निशाना बनाकर उनको मारने की मुहिम शामिल है। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान की वर्तमान सरकार को उखाड़ फेंकना यानी मौजूदा खामेनेई शासन का तख्तापलट करना है। यह "किल लिस्ट" जैसी रणनीति रेजीम चेंज (शासन परिवर्तन) को लक्ष्य बनाती है, जिसमें इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख कमांडरों और शासन के उच्च पदाधिकारियों को टारगेट किया जा सकता है। वहीं राजनेताओं में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे बड़े चेहरे अमेरिकी निशाने पर हो सकते हैं।
अमेरिका के अन्य विकल्पों में टारगेटेड हवाई हमले शामिल हैं। इसमें ईरान की परमाणु साइटें और मिसाइल ठिकाने सबसे अहम हैं, जो अमेरिकी सेना के हिट लिस्ट में हैं। ये हमले "मिडनाइट हैमर" जैसे पिछले ऑपरेशनों से अलग हो सकते हैं, जहां बड़े पैमाने पर निरंतर हवाई युद्ध की योजना है। अमेरिका मध्य पूर्व में विमान वाहक पोतों, युद्धपोतों और हवाई शक्ति का सबसे बड़ा जमावड़ा कर रहा है, जो 2003 के इराक युद्ध के बाद का सबसे बड़ा है। ट्रंप ने "डिसाइसिव" (निर्णायक) कार्रवाई की बात कही है, लेकिन उन्होंने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। यह ब्रिफिंग ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता जारी है, लेकिन तेहरान अमेरिकी मांगों परमाणु हथियार बनाने की क्षमता खत्म करने को पूरी तरह नहीं मान रहा।
अमेरिका ने ईरान के आसपास करीब 150 फाइटर जेट, 12 एयरक्रॉफ्ट करियर, कई युद्धपोतों की तैनाती कर दी है। इससे ईरान और अमेरिका में तनाव बढ़ गया है। ईरान ने भी अमेरिकी हमलों से बचने के लिए अपने एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत किया है। ईरान के जंगी जहाज, फाइटर जेट्स और मिसाइलें भी युद्ध की की आहट के बीच जवाबी तैयारी में जुटे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के प्रस्ताव अपर्याप्त हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि हमला होने पर वह जवाबी कार्रवाई करेगा, और अपनी कमजोरियों को दूर करने का दावा किया है। ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारी मानते हैं कि हमला रेजीम को गिराने की गारंटी नहीं देगा, लेकिन सभी विकल्प खुले हैं। गल्फ सहयोगी देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई ने कहा है कि वे अमेरिकी हमले में अपनी धरती का इस्तेमाल नहीं होने देंगे, जिससे ट्रंप के विकल्प सीमित हो सकते हैं।
अमेरिकी हमले से निपटने की तैयारी में ईरान अपनी परमाणु साइटों को बंकरों में बदल रहा है और अमेरिका "आर्मडा" तैनात कर रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों में यह दावा किया गया है। यह स्थिति मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा रही है। इसी बीच ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान अपनी नीतियां नहीं बदलेगा, तो ऐसई कार्रवाई होगा, जिसे पहले "कभी देखा नहीं गया होगा। "
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